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Monday, November 27, 2017

वो बगीचे का फूल

एक अनमना सा खयाल मन में आया
वो बगीचा का फूल है,या मुरझाया
स्मृति में मेरी अभी भी उसकी सुगंध है
क्या हुआ जो वो अब बदरंग है
उस मुरझाये फूल के निचले हिस्से में
पता है बीज हैं ढेर सारे
जो फूल ने मेरे लिए छोड़े हैं
अरे!उसे खयाल है जो मेरा
वो जानता था कि उसके झलक से
मेरा चित्त प्रशन्न हो जाता है
पर उसका एक समय था
छोटा था पर एक उद्देश्य था
उद्देश्य हमें ताज़गी देना
और जो गया तो दे गया
ढेर सारे बीज जो मैं बो दूं तो
हो जाएँगे ढेर सारे नन्हे पौधे
और भर देंगे मेरे बगीचे को
जो सजे होंगे ढेर सारे फूलों से
मुझे एक सिख मिली उस दिन
उस मुरझाते हुए फूल से
क्यूँ न हम भी बाँटे कुछ अच्छाइयाँ
जो बीज बनके लोगों के बीच
इस धरती के बगिया में रहें
जो हम न रहें
तो ये प्रेम गूँजेगा
एक सुकून सा मिलेगा
हाँ!वही सुकून जो कल-परसो
इसी फूल को देखकर मुझे मिला था।
©युगेश
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