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Tuesday, May 8, 2018

अहं

धृतराष्ट्र आँखों से अंधा
पुत्र दुर्योधन अहं से अंधा था
उसकी नज़रों से देखा केशव ने
चित्र- गूगल आभार 
चारों ओर मैं ही मैं था।

जब भीम बड़े बलशाली से
बूढ़े वानर की पूँछ न उठ पाई
बड़ी सरलता से प्रभु ने
अहं को राह तब दिखलाई।

जैसे सुख और माया में
धूमिल होती एक रेखा है
वैसे मनुज और मंज़िल के बीच
मैंने अहं को आते देखा है।

जितनी जल्दी ये ज़िद छुटे
अहंकार का कार्य रहे,अहं छुटे
मनुज को भान स्वयं का होता है
सूर्य वही उदय तब होता है।
©युगेश

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