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Sunday, August 18, 2019

तुम होते तो

तुम होते तो
न होती ये रात
चित्र - गूगल आभार 
तन्हाई वाली
न होता ये बवंडर
मेरे अंदर
जो कचोटता है मुझे
फिर, जब उफ़न कर
शान्त होता है
और धीरे से
मेरे दिल की कुंडी
खोल देता है
उसे लगता है
तुम वापस आओगे
पर उसे क्या मालूम
कि मैंने दिल की चौखट
में कोई डेरा
कभी नहीं डाला
जो था तुम्हें सौंप दिया था
"मेरी आत्मा"
अब कोई क्या ले जाएगा
तुम्हें मालूम हो जाता
जो तुम होते तो।
©युगेश
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Wednesday, February 13, 2019

पत्थर दिल

लोग कहते हैं
पत्थर दिल हूँ मैं
फ़क़त ये बात जानने को
तुमसे बातें करनी जरूरी थी
कि तभी सुनाई दी धड़कन
वही जो मंद पड़ गयी थी
पर तुम्हारा नाम लेते ही
उनमें भी उफान आ गया
मेरे हृदय की भी हालत
अहल्या सी ही थी,बिल्कुल पाषाण
और राम के चरण की तरह
तुम्हारे नाम ने उसमें जीवन फूँक दिया
और आज़ाद कर दिया उस श्राप से
जिसे किसी गौतम ने नहीं
बल्कि मैंने दिया था
क्यूँकि ये गलती कर बैठा था
तुमसे दिल लगाने की।
©युगेश
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Sunday, December 23, 2018

शनाख़्त मोहब्बत की

शनाख़्त नहीं हुई मोहब्बत की हमारी
जज़्बात थे,सीने में सैलाब था
पर गवाह एक भी नहीं
लोगों ने जाना भी,बातें भी की
पर समझ कोई न सका
समझता भी कैसे
अनजान तो हम भी थे
चित्र - गूगल आभार 
एक हलचल सी होती थी
जब भी वो गुज़रती थी
आहिस्ता आहिस्ता
साँसें चलती थी
एक अलग सी दुनिया थी
जो मैं महसूस करता था
मेरी दुनिया में उसके आने के बाद
आज जो कठघरे में खड़ा था
सबूत दफ्न थे मेरे जिगर में
सियासत उसी की थी
काज़ी भी वही
फिर फैसला मेरा कहाँ था
एक समुद्र मंथन मेरे सीने में भी हुआ
फर्क बस ये था मैंने दोनो छोर
उसी के हाँथों में दे दिए थे
अब आब-ए-हयात निकले या ज़हराब
अब सब जायज था
सब कबूल था।
©युगेश
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Monday, July 23, 2018

दिल के किराएदार

बकौल मोहब्बत वो मुझसे पूछता है
दिल के मकान के उस कमरे में
क्या?अब भी कोई रहता है।
थोड़ा समय लगेगा,ध्यान से सुनना
बड़ी शिद्दत से बना था वो कमरा
कच्चा था पर उतना ही सच्चा था
उसे भी मालूम था कि उसकी
एक एक ईंट जोड़ने में मेरी
चित्र - गूगल आभार 
एक एक धड़कन निकली थी
इकरारनामा तो था
पर उस पर उसके दस्तख़त न हो पाए
उसे कोई दूसरा कमरा पसंद था
मेरा कमरा थोड़ा कच्चा था
सो अब सीलन पड़ने लगी थी
थोड़ी दरारें भी आ गईं थी
लोगों के कहने पर थोड़ी
मरम्मत करवाई है
सीलन और दरारें थोड़ी भरने लगी हैं
अब मैं वो कमरा किराये पर लगाता हूँ
किरायेदार भी अच्छे मिल जाते हैं
पर किसी में ऐसी बात नहीं मिली
कि कमरे को मकान से जोड़ दे
दरारे कम हो गई हैं
पर अब भी कुछ बाकी हैं
हाँ, मैंने इकरारनामे की कुछ शर्तें
बदल जरूर दी हैं
किराया ठीक ठाक मिल जाता है
तकलीफ अब उतनी नहीं होती।
©युगेश

https://youtu.be/M2LG7xv2y7g
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Sunday, May 5, 2013

ये ज़ाम प्रिये

उनसे दूर कहीं मैं इस कमरे में
बैठा लेकर ज़ाम
पर जाने क्यूँ दिल को कचोटता
बस वो प्यारा सा नाम /
हाँथों में ये ज़ाम लिए
बस भली सुबह की आस प्रिये
तू तो मेरी जान रही
अब मैं तेरे बिन बेजान प्रिये /
जान जानकर तुझको जो
प्रस्फुटित वो प्यार प्रिये
तू जो मेरे साथ रही
मैं जीता दिल को हार प्रिये /
जो मैं तुझसे लड़ता हूँ
ये तकरार नहीं है प्यार प्रिये
जो न होंठों से टकराती बाँसुरी
क्या  रहता कोई संगीत प्रिये /
बस कुछ समय की बात रही
मैं देता खुद को आस प्रिये
बस इस कारन ही हाँथों में है
ये छोटा सा जाम प्रिये /
बस इस कारन ही हाँथों में है
ये छोटा सा जाम प्रिये /
©युगेश



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Saturday, April 6, 2013

तुझे क्या पता ये वक़्त


तुझे क्या पता ये वक़्त
हमने कैसे बिताया था/
कि पगडंडी पर पड़ा हर एक काँटा
हमने अपने पैरों तले पाया था/
कि तेरे साथ बिताए लम्हों के पत्ते
अब सूख चले थे/       
कि तू आएगा यादों की नई बसंत लेकर
ये सोच हमने उन्हे अब तक संजोया था/
कि तेरी वो सूखी नजमें अब भी
मेरे ज़हन मे ज़िंदा हैं/
कि तेरे ये मुरझाए ख़त
आज भी मुझे सोने नहीं देते/
ठीक कहा तूने सू गयी थी मेरे पलकों की नमी
जो क्षण कुछ और हो जाते तो शायद देख नही पाती/
कि समेट ले मुझे अपनी आगोश में
कि कब से इस क्षण को जीने के लिए हर पल मरी हूँ/
कि बुझ ना पाएगी प्यार की ये लौ
आख़िर इतना कुछ खोकर तुझे पाया है हमने/
©युगेश
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