Indians और civic sense
अजीब दास्तां हैं ये
शुरू होने से पहले ही खत्म
कुछ को लगता है
ये अपना style है
पर ये सोच ही बड़ी fragile है।
सरकारी प्रयोजन और संसाधन
Public tax money द्वारा प्रायोजित
तो सरकारी पार्क का फूल
हमारी प्रियतमा के बालों में सुशोभित
और museum का wall
बेधड़क अलंकारों से अलंकृत
सोचना बिल्कुल futile है
चचा No Smoking Zone में
Smoke कर , करते smile हैं।
ग़ाफ़िल अपने कर्तव्य से जरूर
पर अधिकारों को लेकर सजग है
"कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन"
समझना कितना मुश्किल है
" कर मन्ने की , जा उस रस्ते
माँ फल शेष करके फेंक
वहाँ जहाँ फेंका चना"
कितना आसान , कितना सरल है।
"धर्मो रक्षति रक्षितः"
अब कौन समझता है
"संसाधनम् स्वमेव भक्षितः"
कितना cool लगता है
500 रुपये के रेलवे टिकट को
हम भरसक वसूलते हैं
Dustbin होते हुए भी कूड़ा फर्श पर
और bedsheet पर हाथ पैर मुँह
बड़ी तबियत से रगड़ते हैं।
Indians को लेकर बुरा नहीं मानना है
Generalisation नहीं मेरी अवधारणा है
पर हर जगह दिखता यही है
और कोई करे , तो कोई टोकता नहीं है
Sense of entitlement बहुत बड़ा खतरा है
तोड़ता देश को ये कतरा-कतरा है।
©युगेश कुमार






